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अब देखिये कौन आए जनाजे को उठाने – माँ – पार्ट – 5

माँ – पार्ट – 5 अब देखिये कौन आए जनाज़े को उठाने, यूँ तार तो मेरे सभी बेटों को मिलेगा, अब अँधेरा मुस्तक़िल रहता है इस दहलीज़ पर, जो हमारी मुन्तज़िर [Read More…]

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गले मिलने को आपस में दुआयें रोज आती हैं – माँ – पार्ट – 3

  माँ – पार्ट – 3 गले मिलने को आपस में दुआयें रोज आती हैं, अभी मस्जिद के दरवाज़े पे माएँ रोज़ आती हैं, कभी-कभी मुझे यूँ भी अज़ाँ बुलाती [Read More…]

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हम उन्हें वो हमें भुला बैठे

  हम उन्हें वो हमें भुला बैठे, दो गुनहगार ज़हर खा बैठे, हाल-ऐ-ग़म कह-कह के ग़म बढ़ा बैठे, तीर मारे थे तीर खा बैठे, आंधियो जाओ अब आराम करो, हम [Read More…]

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