लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है

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rahat indori ghazals

लोग हर मोड़ पर रुक रुक के संभलते क्यों है,
इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है ।

मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना  कोई तारा हूँ,
रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं ।

नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से,
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं ।

मोड़ तो होता हैं जवानी का संभलने के लिये,
और सब लोग यही आकर फिसलते क्यों हैं ।

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Log har mod pe ruk ruk ke sambhalte kyon hain,
Itna darte hain to phir ghar se nikalte kyun hain,

Main na jugnu hu diya hu na koi tara hu,
Raushni wale mere naam se jalte kyon hain,

Need se mera taalluk hi nahi barson se,
Khwab aa aa ke meri chhat pe tahalte kyon hain,

Mod to hota hai jawani ka sambhalne ke liye,
Aur sab log yahin akar phisalte kyon hain !!


 


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